
हमारा पडोसी देश पाकिस्तान बदहाली के दौर में पहुंच चुका है। आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में केवल 5.6 अरब डॉलर का विदेशी ऋण मिला जो सालाना बजट अनुमान के करीब एक चौथाई ही है।
IMF ने वित्त वर्ष 2023 के लिए पाकिस्तान की सकल वित्तपोषण जरूरतों को 34 अरब डॉलर और विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने के लिए 6 अरब डॉलर की जरूरत का अनुमान लगाया है। इससे पाकिस्तान की कुल उधारी 40 अरब डॉलर हो जाएगी।
आंकड़ों से पता चलता है कि जुलाई से दिसंबर 2022 तक विदेशी ऋण वितरण केवल 5.6 अरब डॉलर रहा, जिससे केंद्रीय बैंक के पास मौजूद विदेशी मुद्रा भंडार में भारी गिरावट आई।

पाकिस्तान के हालात इतने क्यों बिगड़े?
पाकिस्तान की खस्ता हालत की वजह उसका IMF की शर्तों को पूरा न कर पाना है। पाकिस्तानी सरकार IMF की नौवीं समीक्षा को समय रहते पूरा करने में विफल रही।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने घोषणा की है कि वह अपने डेलिगेशन को बातचीत के लिए पाकिस्तान भेजेगा। हालांकि IMF के बयान में सूचीबद्ध शर्तों से संकेत मिलता है कि पाकिस्तान को 9 फरवरी तक वार्ता पूरी करने के लिए कड़े प्रयास करने होंगे।
#TipppyTips
- पाकिस्तान के पास अब सिर्फ 3.1 अरब डॉलर्स का ही विदेशी मुद्रा भंडार शेष
- पाकिस्तान को महज 20 करोड़ डॉलर ही विदेशी क़र्ज़ में मिले
- अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने पाकिस्तान को नेगेटिव रेटिंग्स और ऋण मामलों में रद्दी करार दिया है
- इस्लामिक विकास बैंक से भी नहीं मिल पा रही पूरी मदद



